आधुनिक शिक्षा की चुनौतियों और विसंगतियों के समाधान में बौद्ध व्यावहारिक दर्शन एवं 'शिक्षात्रय' का एक विश्लेषणात्मक मूल्यांकन

Authors

  • अनीता आर्य असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, कालीचरण पी.जी. कॉलेज लखनऊ विश्वविद्यालय Author
  • शशांक कीर्ति शोधार्थी, एम०ए० समाजशास्त्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/tvsjiir.v1i2.04

Keywords:

बौद्ध दर्शन, शिक्षात्रय, शील-समाधि-प्रज्ञा, प्रतीत्यसमुत्पाद, समकालीन प्रासंगिकता, होलिस्टिक लर्निंग, समावेशी शिक्षा।

Abstract

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में आधुनिक शिक्षा प्रणाली मुख्य रूप से सूचना-केंद्रित, व्यावसायिक और उपाधि-उन्मुख हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास, आंतरिक अशांति और तीव्र मानसिक तनाव जैसी विसंगतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य प्राचीन बौद्ध दर्शन के दार्शनिक एवं शैक्षिक दृष्टिकोणों की समकालीन प्रासंगिकता का मूल्यांकन करना है। यह शोध पूर्णतः ऐतिहासिक-दस्तावेजी एवं दार्शनिक शोध विधि पर आधारित है, जिसके अंतर्गत प्राथमिक बौद्ध साहित्यों (त्रिपिटक, जातक ग्रंथ) तथा चीनी यात्रियों (ह्वेनसांग व इत्सिंग) के यात्रा वृत्तांतों की बाह्य एवं आंतरिक आलोचना के माध्यम से साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया है। शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि बौद्ध दर्शन का 'मध्यम मार्ग', 'प्रतीत्यसमुत्पाद' और 'शिक्षात्रय' (शील, समाधि, प्रज्ञा) का संप्रत्यय आधुनिक शिक्षा के 'होलिस्टिक लर्निंग' (समग्र अधिगम) और तनाव प्रबंधन के लिए एक वैज्ञानिक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त, बौद्ध कालीन विश्वविद्यालयों (नालंदा व तक्षशिला) का बहु-स्तरीय और कौशल-आधारित पाठ्यक्रम समकालीन समावेशी और व्यावसायिक शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूर्णतः सक्षम है।।

Downloads

Published

2026-06-25

Issue

Section

Articles

How to Cite

आधुनिक शिक्षा की चुनौतियों और विसंगतियों के समाधान में बौद्ध व्यावहारिक दर्शन एवं ’शिक्षात्रय’ का एक विश्लेषणात्मक मूल्यांकन. (2026). THE VISIONARY SPECTRUM JOURNAL OF INNOVATION AND INTERDISCIPLINARY RESEARCH, 1(2), 31-37. https://doi.org/10.64880/tvsjiir.v1i2.04