भगिनी निवेदिता के शैक्षिक दर्शन में शिक्षण विधियाँ एवं आधुनिक शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता

Authors

  • सर्वेश कुमार शोधार्थी, शिक्षा संकाय, डा0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या। Author
  • डा0 चमन कौर सहायक प्रोफेसर, शिक्षक शिक्षा विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज,गोण्डा। Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/tvsjiir.v1i3.04

Keywords:

भगिनी निवेदिता, शैक्षिक दर्शन, शिक्षण विधियाँ, आधुनिक शिक्षा।

Abstract

भगिनी निवेदिता भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक ऐसी शिक्षाविद् एवं समाज सेविका के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान अथवा परीक्षा-केंद्रित प्रक्रिया न मानकर व्यक्ति एवं राष्ट्र के समग्र विकास का माध्यम माना। उनका वास्तविक नाम मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल था। स्वामी विवेकानंद के संपर्क में आने के पश्चात उन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया तथा विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना, चरित्र निर्माण, सांस्कृतिक जागरूकता और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शैक्षिक विचारों में भारतीय संस्कृति, अनुभवात्मक अधिगम, सक्रिय सहभागिता, मातृभाषा, प्रकृति एवं परिवेश से सीखना, प्रश्नोत्तर, निरीक्षण, अनुकरण, कार्य द्वारा सीखना तथा नैतिक एवं चरित्रपरक शिक्षा को विशेष स्थान प्राप्त था। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अनुभवात्मक अधिगम, कौशल-आधारित शिक्षा, मूल्य शिक्षा, मातृभाषा में शिक्षण, समावेशी शिक्षा, बाल-केंद्रित शिक्षा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष बल दिया जा रहा है। इन संदर्भों में भगिनी निवेदिता की शिक्षण संबंधी अवधारणाएँ अत्यंत प्रासंगिक दिखाई देती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य भगिनी निवेदिता के शैक्षिक दर्शन में निहित प्रमुख शिक्षण विधियों का विश्लेषण करना तथा आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में उनकी उपयोगिता एवं प्रासंगिकता को स्पष्ट करना है।

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Published

2026-08-19

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Articles

How to Cite

भगिनी निवेदिता के शैक्षिक दर्शन में शिक्षण विधियाँ एवं आधुनिक शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता. (2026). THE VISIONARY SPECTRUM JOURNAL OF INNOVATION AND INTERDISCIPLINARY RESEARCH, 1(3), 22-30. https://doi.org/10.64880/tvsjiir.v1i3.04