भारत में भौगोलिक ज्ञान का विकास: पुराणों के विशेष सन्दर्भ में

Authors

  • डॉ. श्रवण कुमार शुक्ल असि. प्रो. भूगोल, आ. न. दे. किसान पी. जी. कालेज बभनान गोण्डा, उ. प्र. Author
  • डॉ. भूपेश कुमार मिश्र असि. प्रो. स्नातकोत्तर भूगोल विभाग, जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा (सारण), बिहार Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/tvsjiir.v1i3.02

Keywords:

पुराण, भौगोलिक ज्ञान, जम्बू द्वीप, पर्यावरण, सांस्कृतिक भूगोल, भारतवर्ष

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र प्राचीन भारतीय ग्रन्थों, मुख्य रूप से पुराणों में निहित भौगोलिक ज्ञान और उसकी आधुनिक भूगोल में प्रासंगिकता का अध्ययन करता है। पुराणों में बह्माण्ड की रचना, पृथ्वी का विभाजन, नदियों, पर्वतों और जलवायु का वर्णन मिलता है। यद्यपि पुराणों का स्वरूप धार्मिक तथा मिथिकीय है फिर भी उनमें वर्णित भौगोलिक अवधारणायें प्रारम्भिक भौगोलिक ज्ञान के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करती हैं। यह शोध पत्र पुराणों में वर्णित भौगोलिक अवधारणाओं, यथा- जम्बू द्वीप, सप्त द्वीप, वर्ष, पर्वत तन्त्र(कुल पर्वत) और नदी तन्त्र का विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। विभिन्न पौराणिक ग्रन्थों (विष्णुपुराण, मत्स्यपुराण, ब्रहमाण्ड पुराण और मार्कण्डेय पुराण)के आलोक में सूक्ष्म परीक्षण करते हुए यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पहले के भूगोल वेत्ताओं को भारतीय उपमहाद्वीप की स्थलाकृति, अपवाह प्रणाली और जलवायु का सटीक ज्ञान था। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि पुराणों के माध्यम से प्राचीन समाज ने प्रकृति, पर्यावरण और स्थानिक संरचनाओं को किस प्रकार से प्रभावित किया है, साथ ही पौराणिक भूगोल केवल कल्पनाशीलता पर ही आधारित न होकर उन्नत प्रादेशिक एवं मानचित्रण की कला को अपने में आत्मसात किये है।  

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Published

2026-08-13

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Section

Articles

How to Cite

भारत में भौगोलिक ज्ञान का विकास: पुराणों के विशेष सन्दर्भ में. (2026). THE VISIONARY SPECTRUM JOURNAL OF INNOVATION AND INTERDISCIPLINARY RESEARCH, 1(3), 08-15. https://doi.org/10.64880/tvsjiir.v1i3.02